Mahashivratri 2019: कब है महाशिवरात्रि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजन विधि

Mahashivratri 2019
Mahashivratri 2019

Mahashivratri 2019: खुश हो जाइए क्योंकि देवों के देव महादेव को खुश करने वाला त्यौहार आ गया है। महाशिवरात्रि जो लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं वह लोग महाशिवरात्रि का व्रत भी अवश्य करते है। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि व्रत पूजा कथा और कुछ उपायों का विशेष महत्व होता है। अगर हम बात करें कि 2019 में महाशिवरात्रि कब है तो 2019 में महाशिवरात्रि 4 मार्च को है ज्यादातर महाशिवरात्रि फरवरी या मार्च में ही होती है।

कब होती है महाशिवरात्रि:-

महाशिवरात्रि व्रत के लिए हमारे शास्त्रों में कुछ नियम बताए गए हैं:-

  • चतुर्थी पहले दिन निशीथ व्यापिनी हैं उसी दिन हम शिवरात्रि मनाते है। रात्रि का आठवां मुहूर्त निशीथ काल होता है अगर आपको सीधे शब्दों में कहें तो जब चतुर्थी आरंभ होती है तो रात को आठवाँ मुहूर्त चतुर्दशी तिथि में ही आता है तो उसी दिन हम शिवरात्रि मनाते है।
  • चतुर्थी दूसरे दिन निशीथ काल के प्रथम भाग को छूने और प्रथम दिवस पूरे निशीथ को व्याप्त करें तो पहले दिन ही देवों के देव महादेव के त्यौहार महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है।
  • पहले वाली स्थितियों को छोड़कर बाकी के हर स्थिति में अगले दिन ही मनाया जाता है।
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महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त:-

निशीथ काल पूजा मुहूर्त : 24:08:03 से 24:57:24 तक अवधि :0 घंटे 49 मिनट का समय
महाशिवरात्री पारणा मुहूर्त : 06:43:48 से 15:29:15 तक 5 मार्च 2019 को

महाशिवरात्रि पूजा विधि:-

  • सबसे पहले धतूरा और भांग, पानी, दूध और शहद से भगवान शिव का अभिषेक करना है।
  • इसके बाद सिंदूर और इत्र भगवान शिव के शिवलिंग को लगाना है यह पुण्य की प्राप्ति करवाता है।
  • बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि करवाते है।
  • फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को व्यक्त करते है।
  • दीपक को ज्ञान की प्राप्ति का स्रोत माना जाता है।
  • जलती धूप, धन, अनाज।
  • पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष का संकेत भी देते है।
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महाशिवरात्रि का महत्व:-

चतुर्थी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान शिव है इसलिए हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को शिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है। हमारे ज्योतिष शास्त्रों में इस तिथि को बहुत ही शुभ माना जाता है गणितीय ज्योतिष के अनुसार महाशिवरात्रि के समय सूर्य उत्तरायण हो चुके होते है। और साथ में ऋतु परिवर्तन चल रहा होता है ज्योतिष के अनुसार चतुर्थी के दिन चंद्रमा सबसे कमजोर स्थिति में होता है। आपने देखा होगा कि चंद्रमा को भगवान शिव ने अपने माथे पर धारण किया होता है अतः भगवान शिव की पूजा करते हैं तो आपका चंद्र प्रबल होता है जो मन का कारक भी है। अगर आपको सरल भाषा में कहें तो जब हम भगवान शिव की आराधना करते हैं तो हमारी इच्छा शक्ति प्रबल हो जाती है और हमारे अंदर अदम्य साहस और दृढ़ता का संचार होता है।

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